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MP विधानसभा चुनाव: वोटिंग के बाद कुछ ऐसे बीता नेताओं का दिन





चुनाव में वोटिंग पूरी हो जाने के अगले दिन को नेताओं ने अपनी थकान दूर करने और बचे हुए काम पूरे करने के लिए आज का दिन चुना. कहीं पक्षियों को दाना देकर तो कहीं रेस्टोरेंट में जाकर डोसा-सांभर खाकर नेताओं ने चुनावी थकान को दूर किया. यही नहीं, चुनाव की व्यस्तता के बीच बचे हुए कामों को भी पूरा करने के लिए नेताओं को यही दिन मुफीद लगा.
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में 28 नवंबर को वोटिंग पूरी हो चुकी है. बीते एक महीने से चुनावी तैयारियों में लगे नेता अब अपनी थकान उतारने में लगे हैं. वोटिंग के अगले दिन नेताओं ने न केवल अपनी थकान उतारी बल्कि बचे हुए ज़रूरी काम पूरे किए.

पक्षियों को दाने खिलाये, कार्यकर्ताओं के लिए बनवाई जलेबी

भोपाल की सबसे वीआईपी सीट गोविंदपुरा से बीजेपी प्रत्याशी और बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर ने सुबह-सुबह ही घर में मौजूद पक्षियों को दाना खिलाकर दिन की शुरुआत की. यही नहीं, उन्होंने घर में ही हलवाई को बुलवाकर पकोड़े और जलेबियां बनवाई और उसे अपने हाथों से कार्यकर्ताओं को परोसा. गौर ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने चुनाव में जो मेहनत की है उनके लिए ही ये व्यवस्था की गई है.

दिग्विजय ने खाया 'डोसा-सांभर'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी वोटिंग के अगले दिन भोपाल के एक रेस्टोरेंट में कार्यकर्ताओं के साथ खाना खाते और चुनावी थकान उतारते दिखे. दिग्विजय दोपहर को अचानक भोपाल के न्यू मार्केट पहुंचे और कार्यकर्ताओं संग खाना खाया. दिग्विजय यहां करीब 2 घंटे तक रुके. उन्होंने बताया कि वो इस रेस्टोरेंट में बीते 30 साल से आ रहे हैं और उन्हें यहां का इडली, डोसा और सांभर बहुत पसंद है.

बीमार पिता के लिए निकाला समय

चुनावी व्यस्तता खत्म होने के बाद भोपाल की नरेला सीट से प्रत्याशी विश्वास सारंग ने वोटिंग के अगले दिन समय मिलते ही बीमार पिता के लिए डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लिया और उन्हें अस्पताल ले गए. बोले चुनाव के दौरान भी पिता भर्ती हुए थे लेकिन प्रचार से वक्त निकाल पाए इसलिए अब डॉक्टर के पास ले जा रहे हैं.

मध्यप्रदेश में बीते एक महीने से चुनावी लड़ाई चरम पर थी और अब सबको नतीजों का इंतजार है. ऐसे में प्रत्याशियों को आराम का एक दिन मिलना तो बनता ही है.



भारी कशमकश के बीच विधायक दल की बैठक शुरू हुई जिसमें मुख्यमंत्री का चुनाव होना था. वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एनके सिंह बताते हैं कि अर्जुन सिंह ने पिछड़ा वर्ग से मुख्यमंत्री बनने की वकालत करते हुए सुभाष यादव का नाम आगे बढ़ा दिया. बैठक में सुभाष के नाम पर सहमति न बनते देख अर्जुन सिंह ने अपनी



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