महासाध्वी श्री राजमती जी आदि ठांणा 3 का नवग्रह आश्रम में मंगल प्रवेश
वेश परिवर्तन करने के साथ-साथ हृदय के भावों में परिवर्तन भी होना चाहिए: महासाध्वी श्री राजमती
भीलवाड़ा 6 दिसम्बर
निकटवर्ती मोतीबोर खेड़ा में संचालित श्रीनवग्रह आश्रम से गुरूवार को अलसुबह महासाध्वी श्री राजमती जी म.सा., साध्वी श्री विजयप्रभाजी म.सा. व साध्वी श्री विद्याश्रीजी म.सा. आदि ठाणा 3 का मंगल प्रवेश हुआ। विहार करते हुए आश्रम पहुंची महासाध्वी राजमति आदि ढाणा 3 का आश्रम में मंगल प्रवेश पर आश्रम संचालक हंसराज चैधरी ने भव्य स्वागत किया तथा गोचरी का सौभाग्य भी उनको प्राप्त हुआ। महासाध्वी श्री राजमती जी म.सा., साध्वी श्री विजयप्रभाजी म.सा. व साध्वी श्री विद्याश्रीजी म.सा. आदि ठाणा 3 का स्वागत करते हुए आश्रम संचालक हंसराज चैधरी ने आश्रम का साहित्य उनको भेंट किया।
आश्रम पहुंचने के बाद आश्रम में महासाध्वी श्री राजमती जी म.सा ने कहा कि मनुष्य को क्रोध, माया, लोभ जैसी बुराइयों से दूर रहना चाहिए। मनुष्य के इन बुराइयों में लिप्त होने से कर्म बंधन रुक जाता है। उन्होंने कहा कि दान, शील, तप और भावना से कर्म की निर्जरा होती है। धर्म-कर्म करना जीवन का प्रमुख अंग है। वेश परिवर्तन करने के साथ-साथ हृदय के भावों में परिवर्तन भी होना चाहिए। सत्संग प्रेम से ही जीवन सफल होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में जीने की कला सीखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जीवन जीने की कला सीख लेता है, उसका जीवन सफल हो जाता है। वर्तमान में मनुष्य सांसारिकता में घिरा हुआ है। सांसारिक मोह-माया में आसक्त रहकर मनुष्य प्रभु की भक्ति से विमुख हो रहा है। धर्म जीवन की विशिष्टता कला का ही नाम है। कैसे जीना है, यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। केवल जीना मात्र जीना नहीं, बल्कि कलापूर्ण जीवन जीना सीखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के पास धन होना पाप नहीं है, बल्कि धन के प्रति आसक्त रहना पाप है। मनुष्य को अपना स्वभाव जीभ की तरह रखना चाहिए। जीवन कई वस्तुओं के संपर्क में आती है, लेकिन कभी भी उन वस्तुओं में आसक्त नहीं रहती हैं।
महासाध्वी श्री राजमती जी म.सा आदि ठांणा 3 ने श्री नवग्रह आश्रम का निरीक्षण किया तथा वहां से देश भर के रोगियों के उपचार के लिए किये जा रहे प्रयासों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संचालक हंसराज चैधरी और उनकी टीम को आर्शिवचन दिया। महासाध्वी श्री राजमती जी म.सा आदि ठांणा 3 ने नवग्रह आश्रम के प्रति शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह आश्रम वास्तव में मानवता की सेवा कर रहा है, दिन प्रतिदिन इसकी न केवल ख्याति बढ़े वरन यहां आने वाले प्रत्येक रोगी का भी उपचार हो ऐसी वो मंगलकामना करती है।
श्रीनवग्रह आश्रम के संचालक हंसराज चोधरी ने महासाध्वी श्री राजमती जी म.सा आदि ठांणा 3 को आश्रम का साहित्य भेंट करने के साथ वहां मौजूद सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा उनको औषधियों को भी समर्पित किया। संचालक चोधरी ने बताया कि अनायास ही जैन साध्वियों का आश्रम में पधारना न केवल आश्रम के सौभाग्यशाली सिद्व होगा वरन यहां की भूमि भी पवित्र हो गयी है।

