तस्करी कर लाई बजरी से ग्राम पंचयतो में हो रहे सरकारी काम*
भैरू चौधरी - दिनेश पारीक
*कोटड़ी* @ सुप्रीम कोर्ट ने नदी-नालों से बजरी खनन पर रोक लगा रखी है, लेकिन तस्कर बेखौफ ट्रेक्टरो में भरकर बजरी ला रहे हैं। इतना हीं नहीं खुद सरकारी महकमों के निर्माण कार्यों में अवैध बजरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। बिना बजरी के कोई निर्माण काम नहीं हो सकता। इसके बावजूद धड़ल्ले से कार्यों की स्वीकृति जारी की गई जिससे एजेंसियों और संवेदकों के जरिये काम करवाए जा रहे हैं। इसमें फिर सार्वजनिक निर्माण विभाग हो या फिर जलसंसाधन, पंचायती राज विभाग। सभी करोड़ों के बजट से सड़क, भवन से लेकर नहरों का निर्माण और मरम्मत करवा रहे हैं। इसके लिए रोजाना हजारों टन बजरी भरकर कार्यस्थल पर लाई जा रही है। ये ट्रेक्टर गॉवो व कस्बे के चौराहों से होकर निर्माण वाली जगह पहुंच रहे लेकिन बीच में न तो पुलिस और नहीं खनन विभाग इन पर कार्रवाई कर रहा है। कोटड़ी क्षैत्र की कई ग्राम पंचायते मे सीसी सड़के , नाली निर्माण सहित कई सरकारी भवनों का निर्माण हो रहा है जहां रोजाना बड़ी मात्रा में बजरी इस्तेमाल की जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इन निर्माण कामों के लिए बजरी कहा से लाई जा रही है। ककरोलिया घाटी , चौहली , पंडेरी , घेवरीया , नंदराय , बड़लियास , सातोला का खेड़ा , पारोली , गेंदलिया , गेगा का खेड़ा सहित बनास नदी ,कोठारी नदी ,बेड़च नदी से स्टे गॉवो से रात दिन अवैध बजरी खनन की जा रही है। बजरी को ट्रेक्टरो व ट्रको में भरकर निर्माण वाली जगहों पर पहुंचाई जा रही है। ग्राम पंचायतो व अन्य सरकारी विभागो कॉ कामों के लिए यह बजरी आ रही है। संबंधित अधिकारी यह जानते है कि बजरी खनन पर रोक है लेकिन अपने विभागों के कामों को तय समय पर कराने के लिए वह भी खामोश है। पुलिस , खनन विभाग व जिम्मेदार अधिकारीयो से गठजोड़ की आड़ में बजरी की अवैध तरीके से भी सप्लाई की जा रही है।
*रसुकदारे के आगे नतमस्तक होते जिम्मेदार , कोर्ट के आदेशो की परवाह नहीं*
जानकार सूत्रो के अनुसार चुनाव नजदीक है ऐसे मे ग्रामिण क्षैत्रो मे करोड़ों के कार्य कराये जा रहे हैं। पंचायत राज विभाग भी पंचायतो पर आवास समेत अन्य निर्माण काम पूरा कराने का दबाव बना रहे हैं।
*भाव बढ़कर हो गए चौगुने*
जब बजरी पर रोक नहीं थी तब बजरी के भाव 1000 रुपए प्रति ट्रेक्टर था लेकिन अब बढ़कर 4 से 5 हजार प्रति ट्रेक्टर हो चुका है। जिन लोगों को दबाव में निर्माण काम करवाना होता है वह अपने राजनैतिक रूतबे से बजरी दोहऩ कर रहे है वही आमजन को भवन निर्माण के लिए उच्चे भाव में बजरी खरीदनी पड़ रही है।
*क्या कहते है जिम्मेदार*
न्यायलय के आदेशो की पालना मे हर संभव प्रयास किए जा रहे है दोषियो पर कार्यवाई की जायेगी ! पर्याप्त संसाधनो का अभाव है साथ ही नियमो मे बदलाव की भी आवश्यकता है जिससे एक प्रभावशाली टीम का घटन हो जो 24 घंटे अवैध खनन के खिलाफ सक्रीय रहकर कार्यवाई कर सके ! साथ ही आम जनता भी सक्रीय भुमिका निभाए व बजरी दोहन की शिकायत करे!
*"अंशुल सिह उपखंड अधिकारी कोटड़ी"*
कोटड़ी @ भैरू चौधरी व दिनेश पारीक की रिपोर्ट
*कोटड़ी* @ सुप्रीम कोर्ट ने नदी-नालों से बजरी खनन पर रोक लगा रखी है, लेकिन तस्कर बेखौफ ट्रेक्टरो में भरकर बजरी ला रहे हैं। इतना हीं नहीं खुद सरकारी महकमों के निर्माण कार्यों में अवैध बजरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। बिना बजरी के कोई निर्माण काम नहीं हो सकता। इसके बावजूद धड़ल्ले से कार्यों की स्वीकृति जारी की गई जिससे एजेंसियों और संवेदकों के जरिये काम करवाए जा रहे हैं। इसमें फिर सार्वजनिक निर्माण विभाग हो या फिर जलसंसाधन, पंचायती राज विभाग। सभी करोड़ों के बजट से सड़क, भवन से लेकर नहरों का निर्माण और मरम्मत करवा रहे हैं। इसके लिए रोजाना हजारों टन बजरी भरकर कार्यस्थल पर लाई जा रही है। ये ट्रेक्टर गॉवो व कस्बे के चौराहों से होकर निर्माण वाली जगह पहुंच रहे लेकिन बीच में न तो पुलिस और नहीं खनन विभाग इन पर कार्रवाई कर रहा है। कोटड़ी क्षैत्र की कई ग्राम पंचायते मे सीसी सड़के , नाली निर्माण सहित कई सरकारी भवनों का निर्माण हो रहा है जहां रोजाना बड़ी मात्रा में बजरी इस्तेमाल की जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इन निर्माण कामों के लिए बजरी कहा से लाई जा रही है। ककरोलिया घाटी , चौहली , पंडेरी , घेवरीया , नंदराय , बड़लियास , सातोला का खेड़ा , पारोली , गेंदलिया , गेगा का खेड़ा सहित बनास नदी ,कोठारी नदी ,बेड़च नदी से स्टे गॉवो से रात दिन अवैध बजरी खनन की जा रही है। बजरी को ट्रेक्टरो व ट्रको में भरकर निर्माण वाली जगहों पर पहुंचाई जा रही है। ग्राम पंचायतो व अन्य सरकारी विभागो कॉ कामों के लिए यह बजरी आ रही है। संबंधित अधिकारी यह जानते है कि बजरी खनन पर रोक है लेकिन अपने विभागों के कामों को तय समय पर कराने के लिए वह भी खामोश है। पुलिस , खनन विभाग व जिम्मेदार अधिकारीयो से गठजोड़ की आड़ में बजरी की अवैध तरीके से भी सप्लाई की जा रही है।
*रसुकदारे के आगे नतमस्तक होते जिम्मेदार , कोर्ट के आदेशो की परवाह नहीं*
जानकार सूत्रो के अनुसार चुनाव नजदीक है ऐसे मे ग्रामिण क्षैत्रो मे करोड़ों के कार्य कराये जा रहे हैं। पंचायत राज विभाग भी पंचायतो पर आवास समेत अन्य निर्माण काम पूरा कराने का दबाव बना रहे हैं।
*भाव बढ़कर हो गए चौगुने*
जब बजरी पर रोक नहीं थी तब बजरी के भाव 1000 रुपए प्रति ट्रेक्टर था लेकिन अब बढ़कर 4 से 5 हजार प्रति ट्रेक्टर हो चुका है। जिन लोगों को दबाव में निर्माण काम करवाना होता है वह अपने राजनैतिक रूतबे से बजरी दोहऩ कर रहे है वही आमजन को भवन निर्माण के लिए उच्चे भाव में बजरी खरीदनी पड़ रही है।
*क्या कहते है जिम्मेदार*
न्यायलय के आदेशो की पालना मे हर संभव प्रयास किए जा रहे है दोषियो पर कार्यवाई की जायेगी ! पर्याप्त संसाधनो का अभाव है साथ ही नियमो मे बदलाव की भी आवश्यकता है जिससे एक प्रभावशाली टीम का घटन हो जो 24 घंटे अवैध खनन के खिलाफ सक्रीय रहकर कार्यवाई कर सके ! साथ ही आम जनता भी सक्रीय भुमिका निभाए व बजरी दोहन की शिकायत करे!
*"अंशुल सिह उपखंड अधिकारी कोटड़ी"*
कोटड़ी @ भैरू चौधरी व दिनेश पारीक की रिपोर्ट