राजनीति का चलन बदलेगा, यदि! मतदाता का मन बदलेगा!*
*राजनीति का चलन बदलेगा, यदि! मतदाता का मन बदलेगा!*
राजनीति का मकसद आज केवल सत्ता पाना ही रह गया है। अंग्रेजों की सफलता का राज था *‘‘फूट डालो और राज करो।*’’ वे तो चले गये। लेकिन अपना नारा यहीं छोड़ गये। आज भारत भर में नारों का महाभारत छिड़ा हुआ है। जातिवाद, आरक्षण, भ्रष्टाचार, रिश्वत खोरी, लाखों करोड़ों के घोटाले, साम-दाम-दण्ड-भेद, कैसे भी सत्ता पर काबिज होने की होड़ लगी है और इन सब में जनता के सुख-दुख और विकास की बातें गौण हैं। बड़े फक्र के साथ राजनेता कहते है ‘‘विकास तो पागल हो गया है।’’
सत्ताधीश विकास की बड़ी-बड़ी बातें और घोषणाएं करते है, विकास के नाम पर लम्बे-चैड़े बजट की घोषणाएँ तो होती है, लेकिन गांवों और गरीब जनता तक ये सब नहीं पहुंचता है। आजादी के सत्तर साल बाद भी आम आदमी गांवों की जनता वहीं की वहीं है, बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रही है। राजनेताओं में परिवार वाद का बोल बाला है। सब जानते है जनता को तो किसी न किसी को चुनना है। इसलिए सब आश्वस्त है, जनता जायेगी तो कहाँ? आना तो हमारे पास ही है। कभी इस दल के साथ कभी उस दल के साथ! और इस दल-दल से निकलने का रास्ता नजर नहीं आता। क्या दल बदल और दलों का दल दल ही जनता की नियती है? अपने विकास के लिए उसे ऊपर की ओर ही आशा भरी नजरों से देखते रहना होगा। जहां बन्दर बांट का खेल चल रहा है और कभी कभी कुछ टुकड़े जनता की झोली में डाल कर उसे बहकाने का खेल ही चलता रहेगा और इन टुकड़ों का लालच कभी इसे, कभी उसे सत्ता सौंपता रहेगा।
लेकिन अब और नहीं! इसका रास्ता खोजना होगा, आज की युवा पीढ़ी को। यदि बदलाव लाना है तो कुछ संकल्पों के साथ आज की युवा पीढ़ी को इस रण में कूदना पड़ेगा।
संकल्प: 1 मैं अपने क्षेत्र के हर गांव के विकास केलिए बुनियादी सुविधाएं जुटाने का संकल्प लेकर चुनाव लड़ रहा हूं।
संकल्प: 2 जन सेवा मेरा ध्येय रहेगा। अतः मैं न तो वेतन भत्ते लूंगा, न पेंशन लूंगा, न अन्य सुविधाएँ! जनता के बीच जनता का हिस्सा बनकर जनता की तरह ही रहूंगा।
संकल्प: 3 अपने क्षेत्र के हर गांव की बुनियादी आवश्यकताओं का स्थानीय लोगों की राय से आंकलन कर, योजना बनाकर उसके लिए सरकार से बजट लाऊंगा।
संकल्प: 4 केवल बजट लाकर ही निश्चिंत नहीं होऊंगा, बल्कि उसे समयावधि में पूर्ण भी करवाऊंगा।
संकल्प: 5 मेरे कोटे की मिलने वाली राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा क्षेत्र में खेलों के विकास के लिए समर्पित करूंगा।
संकल्प: 6 हर गांव का हर परिवार मेरा परिवार होगा। जिसकी सुख दुख की जिम्मेदारी मेरी होगी।
संकल्प: 7 अगले चुनाव के लिए मैं दावेदारी पेश नहीं करूंगा। बल्कि अपने ही दूसरे नौजवान साथी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करूंगा।
जिले की सात विधानसभा सीटों पर ऐसे युवाओं का आगमन क्षेत्र के विकास पर ही फोकस करें तो राजनीति का अर्थ ही बदल जायेगा।
और इस बदलाव की शुरूआत यदि भीलवाड़ा जिले से हो तो प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की नजरें भी इस क्षेत्र के नतीजों पर रहेगी और आगे चलकर देश और प्रदेश में बदलाव का संकेत होगी।
देखना ये है क्या भीलवाड़ा की जनता और इस क्षेत्र की युवा शक्ति इसके लिए तैयार हैै।
यदि आप इससे सहमत हो तो आप इसे आगे अग्रेषित करें।
द्वारा-*नरेश बूलियां, शाहपुरा मो. नं. 9252622745*
राजनीति का मकसद आज केवल सत्ता पाना ही रह गया है। अंग्रेजों की सफलता का राज था *‘‘फूट डालो और राज करो।*’’ वे तो चले गये। लेकिन अपना नारा यहीं छोड़ गये। आज भारत भर में नारों का महाभारत छिड़ा हुआ है। जातिवाद, आरक्षण, भ्रष्टाचार, रिश्वत खोरी, लाखों करोड़ों के घोटाले, साम-दाम-दण्ड-भेद, कैसे भी सत्ता पर काबिज होने की होड़ लगी है और इन सब में जनता के सुख-दुख और विकास की बातें गौण हैं। बड़े फक्र के साथ राजनेता कहते है ‘‘विकास तो पागल हो गया है।’’
सत्ताधीश विकास की बड़ी-बड़ी बातें और घोषणाएं करते है, विकास के नाम पर लम्बे-चैड़े बजट की घोषणाएँ तो होती है, लेकिन गांवों और गरीब जनता तक ये सब नहीं पहुंचता है। आजादी के सत्तर साल बाद भी आम आदमी गांवों की जनता वहीं की वहीं है, बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रही है। राजनेताओं में परिवार वाद का बोल बाला है। सब जानते है जनता को तो किसी न किसी को चुनना है। इसलिए सब आश्वस्त है, जनता जायेगी तो कहाँ? आना तो हमारे पास ही है। कभी इस दल के साथ कभी उस दल के साथ! और इस दल-दल से निकलने का रास्ता नजर नहीं आता। क्या दल बदल और दलों का दल दल ही जनता की नियती है? अपने विकास के लिए उसे ऊपर की ओर ही आशा भरी नजरों से देखते रहना होगा। जहां बन्दर बांट का खेल चल रहा है और कभी कभी कुछ टुकड़े जनता की झोली में डाल कर उसे बहकाने का खेल ही चलता रहेगा और इन टुकड़ों का लालच कभी इसे, कभी उसे सत्ता सौंपता रहेगा।
लेकिन अब और नहीं! इसका रास्ता खोजना होगा, आज की युवा पीढ़ी को। यदि बदलाव लाना है तो कुछ संकल्पों के साथ आज की युवा पीढ़ी को इस रण में कूदना पड़ेगा।
संकल्प: 1 मैं अपने क्षेत्र के हर गांव के विकास केलिए बुनियादी सुविधाएं जुटाने का संकल्प लेकर चुनाव लड़ रहा हूं।
संकल्प: 2 जन सेवा मेरा ध्येय रहेगा। अतः मैं न तो वेतन भत्ते लूंगा, न पेंशन लूंगा, न अन्य सुविधाएँ! जनता के बीच जनता का हिस्सा बनकर जनता की तरह ही रहूंगा।
संकल्प: 3 अपने क्षेत्र के हर गांव की बुनियादी आवश्यकताओं का स्थानीय लोगों की राय से आंकलन कर, योजना बनाकर उसके लिए सरकार से बजट लाऊंगा।
संकल्प: 4 केवल बजट लाकर ही निश्चिंत नहीं होऊंगा, बल्कि उसे समयावधि में पूर्ण भी करवाऊंगा।
संकल्प: 5 मेरे कोटे की मिलने वाली राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा क्षेत्र में खेलों के विकास के लिए समर्पित करूंगा।
संकल्प: 6 हर गांव का हर परिवार मेरा परिवार होगा। जिसकी सुख दुख की जिम्मेदारी मेरी होगी।
संकल्प: 7 अगले चुनाव के लिए मैं दावेदारी पेश नहीं करूंगा। बल्कि अपने ही दूसरे नौजवान साथी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करूंगा।
जिले की सात विधानसभा सीटों पर ऐसे युवाओं का आगमन क्षेत्र के विकास पर ही फोकस करें तो राजनीति का अर्थ ही बदल जायेगा।
और इस बदलाव की शुरूआत यदि भीलवाड़ा जिले से हो तो प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की नजरें भी इस क्षेत्र के नतीजों पर रहेगी और आगे चलकर देश और प्रदेश में बदलाव का संकेत होगी।
देखना ये है क्या भीलवाड़ा की जनता और इस क्षेत्र की युवा शक्ति इसके लिए तैयार हैै।
यदि आप इससे सहमत हो तो आप इसे आगे अग्रेषित करें।
द्वारा-*नरेश बूलियां, शाहपुरा मो. नं. 9252622745*