रामद्वारा भीलवाड़ा में चतुर्मास कर रहें संत रामशरण शास्त्री के मुखार बिन्द से भक्तिमाल में बताया कि भक्ति करनी पड़ती है कहने सुनने से भक्ति का परिचय नहीं मिलता है।जहां प्रेम होता है वहां भगवान अपना प्रण भी बदल देते है जहां भगवान के साथ 56 करोड़ यादव रहते है वहां पर भगवान ने अर्जुन का रथ हांका भगवान ने पांडवो कि बहुत सेवा करी यहां तक कि द्रोपदी के चप्पल उठाकर भीष्मपिता से आशीर्वाद दिलाया। प्रिया दास ने कहा कि भगवान वह है जो भक्त के लिए सब कुछ दे सक्ते है। गुरू कौन, जिसमें गम्भीरता हो, गुरू दातार हैं जो देना जानते हैं । बिना गुरू के शिष्य भवसागर तार नहीं कर सकतें हैं गुरू के वचनों पर जिसको भरोसा नहीं होता वह सपने में भी सुख नहीं पा सकता हैं। गुरू हमें सच्चा ज्ञान देते हैं । कृष्णदास परिहारी ने टिल्ला को गुरू कण्ठी पहनाई ओर खुब भक्ति करी । संत वह होता हैं जो देना जानते हों । रामनिवास लढ़ा ने बताया कि 31 अगस्त से 6 सितंम्वर तक स्थानीय रामद्वारा में भागवत कथा का भव्य आयोजन होगा