आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में धरती के पुत्र के जाने वाले किसान करते हैं पारंपरिक तरीके से खेती
बागोर
खेती करने के लिए आज कई नई तरह के उपकरण बाजार में आ गए हैं लेकिन आज भी गांवों में कई ऐसे धरती पुत्र किसान है जो पारंपरिक तौर तरीकों से खेती करते हैं | कल क्षेत्र में हुई अच्छी बारिश होने से धरती पुत्र खेतों की ओर लौट रहे हैं और बुवाई का कार्य जोरों शोरों से चल रहा है | वही इस दौरान कई ऐसे धरती पुत्र भी देखे गए जो पारंपरिक तौर तरीकों से खेती कर रहे हैं | ऐसा ही नजारा बाग़ौर कस्बे में देखने को मिला जहां धरती पुत्र किसान उदय लाल जाट अपने खेत पर हल और बैलों की मदद से खेतों में बुवाई का कार्य कर रहे हैं | जो युवाओं के लिए एक मिसाल है | बैलों के गले में बधी हुई घंटी और पैरों के घुंघरू की आवाज वातावरण में एक अलग ही मिठास गोलती हैं | घुंघरू और घंटियों की आवाज के साथ किसान गुनगुनाता हुआ चलता है जिसे उसको थकान तक महसूस नहीं होती हैं |जिसमें से अधिकतर भूमि पर है वह बैलों की माध्यम से खेती करते है | तथा फसल बड़ी होने पर उसे की निराई गुड़ाई भी पारंपरिक तौर-तरीकों से करते हैं जिससे उसका खेती के दौरान लगने वाले समय की बचत व मेहनत कम होती हैं ||